हर शाम के बाद ये रात मिलने आती है,
पर अब पहले जैसी नींद कहाँ आती है,
आती है तो सिर्फ ये बात आती है,
मां तेरी गोद बहुत याद आती है ।।
रोज पूछती है तू हाल मेरा,
मेरी खुशी से जुड़ा हर सवाल तेरा,
पर तेरे आँचल की छायों अब कहा मिल पाती है,
मां तेरी गोद बहुत याद आती है ।।
खिलखिला के हंस देना हर सरगोशी पे मेरी,
और अब समझ जाना खामोशी को मेरी,
तेरी उस मीठी मार की बहुत कमी सताती है,
मां तेरी गोद बहुत याद आती है ।।
बचपन की हर शाम आंखों में उतर आती है,
जब भी मेरी हर छोटी बात तू यूँ चहक के बताती है,
रात की बेसमय भूख पे तेरी वो रोटी कहाँ मिल पाती है,
मां तेरी गोद बहुत याद आती है ।।
और अब समझ जाना खामोशी को मेरी,
तेरी उस मीठी मार की बहुत कमी सताती है,
मां तेरी गोद बहुत याद आती है ।।
बचपन की हर शाम आंखों में उतर आती है,
जब भी मेरी हर छोटी बात तू यूँ चहक के बताती है,
रात की बेसमय भूख पे तेरी वो रोटी कहाँ मिल पाती है,
मां तेरी गोद बहुत याद आती है ।।
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